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गुलशन कुमार के नाम पर आज क्या-क्या है? 'कैसेट किंग' की मौत के 29 साल बाद भी कायम है ये विरासत

What is Gulshan Kumar name today? 29 years after the death of the Cassette King, this legacy remains intact. - Bollywood News in Hindi

रजवल गुप्ता

मुंबई। गुलशन कुमार ने अपने जीवन में संगीत जगत को नई ऊंचाई दी थी लेकिन उनकी मौत के 29 साल बाद उनकी सबसे बड़ी कमाई शायद किसी दुकान, कैसेट या फिल्म से नहीं बल्कि एक ऐसे माध्यम से हो रही है जिसकी उन्होंने अपने समय में कल्पना भी नहीं की होगी। उन्हें 'कैसेट किंग' कहा जाता था और उन्होंने भक्ति संगीत को 1980 और 1990 के दशक में सस्ते कैसेटों के जरिए घर-घर पहुंचाया और आज वही संगीत मोबाइल फोन और इंटरनेट पर अरबों बार देखा जा रहा है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण 'श्री हनुमान चालीसा' का वह वीडियो है, जिसमें गुलशन कुमार दिखाई देते हैं। मई 2011 में टी-सीरीज के भक्ति चैनल पर आया यह वीडियो नवंबर 2025 में 5 अरब व्यूज पार कर गया। यानी गुलशन कुमार के जाने के करीब 14 साल बाद उनका चेहरा एक ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बना, जो दुनियाभर में चर्चा का विषय बना।
यहां कहानी सिर्फ 5 अरब व्यूज की नहीं है। दरअसल, यह वही बाजार है, जिसे गुलशन कुमार ने अपने समय में पहचाना था। जब भारत में संगीत सुनने के लिए कैसेट खरीदे जाते थे, तब उन्होंने समझ लिया था कि भक्ति संगीत का बाजार बहुत बड़ा है। टी-सीरीज ने शुरुआती सालों में भजन और धार्मिक गीतों के कैसेट बड़े पैमाने पर निकाले। गुलशन कुमार की कारोबारी समझ यह थी कि संगीत केवल फिल्म देखने वाले लोगों की जरूरत नहीं है। मंदिर जाने वाला, घर में पूजा करने वाला और छोटे शहर में रहने वाला व्यक्ति भी संगीत का बड़ा ग्राहक हो सकता है। बाद में यही सोच टी-सीरीज के डिवोशनल कैटलॉग की बड़ी ताकत बनी।
'श्री हनुमान चालीसा' के डिजिटल सफर की बात करें, तो वीडियो 10 मई 2011 को जारी हुआ और 2020 में एक अरब व्यूज पार किए। 2023 में यह तीन अरब तक पहुंचा और नवंबर 2025 में पांच अरब के पार चला गया। उस समय मीडिया ने इसे भारत का पहला ऐसा यूट्यूब अपलोड बताया, जिसने पांच अरब व्यूज का आंकड़ा पार किया। ये हैरान करने वाला था। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका नाम किताबों, पुरस्कारों या स्मारकों तक सीमित रहता है लेकिन गुलशन कुमार के मामले में ऐसा नहीं हुआ। उनका नाम एक चलती हुई कर्मशियल म्यूजिक लाइब्रेरी से जुड़ा रहा। पुराने भजन नए वीडियो बनकर आए, पुराने संगीत को नए डिजिटल प्लेटफॉर्म मिले और टी-सीरीज ने अपने डिवोशनल कंटेंट को इंटरनेट पर फैलाया।
गुलशन कुमार की विरासत का एक और हिस्सा इंस्टीट्यूट और अवॉर्ड्स के रूप में दिखाई देता है। गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का नाम सीधे उनके नाम पर है। 2019 में टी-सीरीज की एजुकेशनल विंग ने गुलशन कुमार अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस और गुलशन कुमार यंग अचीवर्स अवॉर्ड भी शुरू किए थे, यानी उनकी विरासत को एजुकेशन में भी इस्तेमाल किया गया।
उनके नाम का एक और बड़ा इस्तेमाल सिनेमा में होना है। 'मोगुल' के नाम से उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाने की योजना लंबे समय से चल रही है। इस प्रोजेक्ट में अलग-अलग समय पर अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे नाम जुड़े। 2025 में इसे नए सिरे से आगे बढ़ाने की खबर आई लेकिन फिल्म अब भी अटकी हुई है।

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Web Title-What is Gulshan Kumar name today? 29 years after the death of the Cassette King, this legacy remains intact.
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