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गोल ही क्यों होते हैं प्लैनेट, चौकोर या पिरामिड क्यों नहीं? जानें कैसे काम करती है ग्रैविटी

Why Are Planets Round—Not Square or Pyramidal? Learn How Gravity Works - Wonders News in Hindi

नई दिल्ली । आपने कभी सोचा है कि हमारी पृथ्वी के साथ ही स्पेस में मौजूद सभी ग्रह गोल ही क्यों होते हैं? वे क्यूब, पिरामिड या किसी अन्य आकार के क्यों नहीं होते? इसका सीधा संबंध गुरुत्वाकर्षण से है, जो ब्रह्मांड में हर वस्तु के आकार और संरचना को तय करने में अहम भूमिका निभाता है। गुरुत्वाकर्षण हर ग्रह को सभी तरफ से बराबर खींचता है, जिसकी वजह से उनका आकार गेंद जैसा गोल हो जाता है। सौर मंडल के सभी ग्रह अलग-अलग आकार और आकृति के हैं। कुछ छोटे चट्टानी हैं तो कुछ विशाल गैसीय। लेकिन एक बात सभी में समान है, वे सभी गोल हैं। फिर चाहे वे छोटे हों या बड़े। गुरुत्वाकर्षण ही वह शक्ति है जो ग्रहों को क्यूब, पिरामिड या किसी अन्य आकार में नहीं, बल्कि गोल बनाने पर मजबूर करती है। बिना गुरुत्वाकर्षण के ब्रह्मांड में कोई भी बड़ा पिंड गोल नहीं हो पाता।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस बारे में विस्तार से जानकारी देता है, जिसके अनुसार, स्पेस में धूल, गैस और छोटे-छोटे पत्थर आपस में टकराते रहते हैं। धीरे-धीरे ये टुकड़े एक साथ जुड़ते जाते हैं। जब इनमें काफी मात्रा में पदार्थ इकट्ठा हो जाता है, तो उनमें अपना खुद का गुरुत्वाकर्षण पैदा हो जाता है। यह गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत हो जाता है कि वह आसपास के सभी छोटे टुकड़ों को अपनी ओर खींच लेता है। जब ग्रह पर्याप्त बड़ा हो जाता है, तो वह अपने रास्ते में आने वाले सभी कणों को साफ कर लेता है।
गुरुत्वाकर्षण ग्रह के केंद्र से हर दिशा में बराबर खींचता है। ठीक उसी तरह जैसे साइकिल के पहिये की तीलियां केंद्र से किनारों को खींचती हैं। इस बराबर खिंचाव की वजह से ग्रह का आकार तीन आयामी गोले जैसा हो जाता है। अगर कोई हिस्सा बाहर निकला हुआ होता है, तो गुरुत्वाकर्षण उसे अंदर की ओर खींच लेता है। इसी प्रक्रिया से ग्रह गोलाकार बनते हैं।
खास बात है कि सभी ग्रह पूरी तरह गोल नहीं होते हैं। ज्यादातर ग्रह काफी हद तक गोल होते हैं, लेकिन कुछ में थोड़ा अंतर होता है। बुध और शुक्र सबसे ज्यादा गोल हैं, लगभग कंचे जैसी पूर्ण गोलाकारता रखते हैं। बृहस्पति और शनि जैसे विशाल गैसीय ग्रहों में थोड़ा अंतर दिखता है। ये अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमते हैं। घूमने की वजह से इनकी भूमध्य रेखा के पास का हिस्सा थोड़ा बाहर की ओर उभर आता है। इसे ‘इक्वेटोरियल बल्ज’ या भूमध्यरेखीय उभार कहते हैं। जब कोई चीज तेज घूमती है, तो उसके बाहरी हिस्से को ज्यादा तेजी से चलना पड़ता है। गुरुत्वाकर्षण इसे अंदर खींचता रहता है, लेकिन घूमने का बल इसे बाहर की ओर धकेलता है। शनि सबसे ज्यादा उभरा हुआ है, उसकी भूमध्य रेखा ध्रुवों से 10.7 प्रतिशत ज्यादा चौड़ी है।
वहीं, बृहस्पति में यह 6.9 प्रतिशत है। ये बास्केटबॉल की तरह थोड़े चपटे दिखते हैं। पृथ्वी और मंगल छोटे हैं और धीरे घूमते हैं, इसलिए इनमें उभार बहुत कम है। पृथ्वी में भूमध्य रेखा सिर्फ 0.3 प्रतिशत ज्यादा चौड़ी है, जबकि मंगल में 0.6 प्रतिशत है। यूरेनस 2.3 प्रतिशत और नेपच्यून 1.7 प्रतिशत इनके बीच की स्थिति में हैं।
--आईएएनएस

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Web Title-Why Are Planets Round—Not Square or Pyramidal? Learn How Gravity Works
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Tags: gravity, pyramidal, ajab gajab news in hindi, weird people stories news in hindi
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