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यहां इस पेड़ के बिना अधूरी है विवाह की रस्में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिकाल से ही वृक्षों की पूजा होती रही है। पीपल, बरगद के वृक्षों को तो सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। वहीं विवाह की रस्मों का भी एक विशेष वृक्ष गूलर गवाह बनता है। गूलर के पेड़ की लकड़ी और पत्तियों से विवाह का मंडप बनता है। इसकी लकड़ी से बने पाटे पर बैठकर वर-वधू वैवाहिक रस्में पूरी करते हैं। जहां गूलर की लकड़ी और पत्ते नहीं मिलते हैं, वहां विवाह के लिए इस वृक्ष के टुकड़े से भी काम चलाया जाता है।

छत्तीसगढ़ में गूलर ‘डूमर’ के नाम से विख्यात है। साथ ही इसके वृक्ष और फल का भी विशेष महत्व है। पंडितों का कहना है कि गूलर का पेड़ अत्यंत शुभ माना गया है। पुराणों के अनुसार इसमें गणेशजी विराजमान होते हैं। इसलिए विवाह जैसी रस्मों में इसका खासा महत्व है।

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Web Title-This tree without incomplete wedding rituals in Chhattisgarh
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