नई दिल्ली, 29 सितंबर। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत शुरू से परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की वकालत करता रहा है और वह इस दिशा में किए जा रहे हर तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत वर्ष 2050 तक 4.70 लाख मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता हासिल कर लेगा और ऎसा देश की तीन स्तरीय परमाणु ऊर्जा योजना के जरिए संभव हो सकेगा। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत व्यापक परमाणु अप्रसार संधि (सीटीबीटी) के बाहर रहकर भी उसके सिद्धांतों से डिगा नहीं है। उन्हौंने इस बात पर जोर दिया कि इसे व्याप और भेदभाव रहित होना चाहिए। डॉ. सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु हथियारों की कटौती के संबंध में एक परमाणु संपन्न और जिम्मेदार देश होने के नाते परमाणु निरस्त्रीकरण सम्मेलन में विखंडनीय पदार्थ कटौती संधि (एफएमसीटी) पर बातचीत में रचनात्मक भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात खेद जताया कि तमाम प्रयासों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय समुदाय परमाणु हथियारों की हो़ड को रोकने में नाकाम रहा। उन्होंने परमाणु हथियारों के गैर-जिम्मेदार हाथों में जाने से रोकने की जरूरत बताई और कहा कि दुनिया के सामने यह सबसे ब़डी चुनौती है।
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अघ्यक्ष अल बारादेई ने इस दिशा में भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए अपील की कि भारत निरस्त्रीकरण सम्मेलन में अहम भूमिका निभाएगा। पिछले दो दशक से भारत ने जिस तरह से आर्थिक विकास किया है, वह कई विकासशील देशों के लिए रोल मॉडल है। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारत में परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जन्म शताब्दी समारोह के तहत किया गया है। इसमें दुनियाभर के वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। इसमें पिछले पांच दशक में परमाणु ऊर्जा की उपलब्धियों और भविष्य में इसकी चुनौतियों पर चर्चा होगी। इस मौके पर अल बारादेई को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार दिया गया।
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