वाशिंगटन, 17 सितंबर। विश्व विख्यात वित्तीय संस्था लेहमन ब्रदर्स के धराशायी होने के एक साल बाद इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि वैश्विक आर्थिक संकट अब समाप्ति की ओर है। इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है। अमरीका और यूरोप समेत एशियाई बाजारों में जबरदस्त तेजी दिखाई दे रही है। एशिया में भारतीय शेयर बाजार पिछले वर्ष के मुकाबले सौ फीसदी से ऊपर आ चुका है। सब प्राइम संकट से अमरीकी में मंदी की शुरूआत हुई और जब संकट चरम पर था तब अमरीकी शेयर बाजार डाओ जोंस और नैस्डैक गोता लगाते हुए अस्सी के दशक से स्तर पर लौट गए, मगर अब जब अमरीकी में रियल स्टेट बिजनेस फिर उठ रहा है और घरों की बिक्री के आंकडे बढने लगे हैं, तो इसका सीधा असर शेयरों पर दिखाई दे रहा है। बुधवार को डाओ जोंस 108 अंक उछल कर छह अक्टूबर 2008 के स्तर पर पहुंच गया और यह नौ हजार 791 अंकों पर बंद हुआ, वहीं आईटी कंपनियों वाला नैस्डैक 30 अंक ऊपर जाकर 2133 अंकों पर बंद हुआ। यूरोप में इटली, जर्मनी और ब्रिटेन के शेयर बाजार भी एक साल के सर्वोच्चा स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। लंदन का सूचकांक फुटसी पिछले साल सितंबर के स्तर पर आ गया है। बुधवार को फुटसी डेढ फीसदी की बढत के साथ 5124 पर बंद हुआ। कच्चो तेल के भाव जहां आर्थिक सुस्ती के समय गिरकर 49 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे, वह अब बढकर 72 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि विकास के ईंधन के लिए जरूरी ईंधन की मांग बढने लगी है। एशियाई बाजारों को अमरीका से बल मिल रहा है।
अमरीकी फैडरल रिजर्व बैंक के प्रमुख बेन बर्नान्के ने कहा है कि ऎसा लगता है कि मंदी अब खत्म हो चुकी है। अमरीका में अगस्त महीने के दौरान औद्योगिक उत्पादन 0.8 फीसदी बढा है। अर्थात अमरीका में घरेलू मांग बढने लगी है जिससे एशियाई देशों से अमरीका को होने वाला निर्यात फिर गति पकड सकता है। एशिया में अगर चीन को छोड दें तो भारत, जापान, थाईलैंड, मलेशिया, ताइवान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी दिखाई दे रही है और ये इस साल के सर्वोच्चा स्तर पर हैं। बैंक ऑफ जापान ने वित्तीय स्थितिको बेहतर बताया है। आंकडों के मुताबिक जापान से निर्यात में वृदि्ध हुई है। भारत में सितंबर महीने में अच्छी बरसात के बाद सूखे की आशंका कम हुई है, जिससे शेयर बाजारों को बल मिला है और आर्थिक विकास दर के छह फीसदी रहने की संभावना जताई जा रही है।
गुरूवार को कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक सितंबर 2007 के स्तर पर पहुंच गया और पांच हजार के आंकडों को पार गया। वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स सूचकांक मई 2008 के बाद पहली बार 16,700 अंकों के ऊपर कारोबार कर रहा है। मगर कुछ विशेषज्ञों ने शेयर बाजारों में अचानक आई तेजी से निवेशकों को सतर्क रहने को कहा है। हांगकांग के डीबीएस बैंक से जुडे पीटर ले का कहना है, एशियाई बाजार अभी सबको पीछे छोड रहे हैं, लेकिन ऎसा सिर्फ बाजार में नकदी आ जाने से हुआ है। मुझे लगता है कि अब यहां से बढत की तुलना में बाजारों के नीचे आने का खतरा ज्यादा है।
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