नई दिल्ली, 5 सितंबर। नेपाल में दो भारतीय पुजारियों की पिटाई की घटना के बाद नेपाल सरकार ने भारत को आश्वस्त किया है कि मंदिर के पुजारियों को माकूल सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस घटना के मामले में भारत ने नेपाल सरकार से बात की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्ण प्रकाश के मुताबिक नेपाल सरकार ने पुजारियों को सुरक्षा मुहैया करवाने का भरोसा दिया है। इस बीच पुजारियों ने मंदिर में सुरक्षा इंतजाम के बीच काम शुरू कर दिया है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में शुक्रवार को माओवादियों ने दो नवनियुक्त भारतीय पुजारियों की पिटाई कर दी थी और कपडे फाड दिए थे तथा जनेऊ तोड दी थी। पुजारियों को बचाने की कोशिश कर रहे चार पुलिसकर्मी भी इस दौरान घायल हो गए थे। मंदिर के मुख्य द्वार के बाहर रखे दानपात्र को माओवादियों ने तोड डाला था। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्ध हमलावरों को पकडा है। पुलिस के मुताबिक हमलावरों में कुछ मंदिर के कर्मचारी ही हैं। पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारियों की नियुक्ति को लेकर माओवादी अपना विरोध जताते रहे हैं। उनकी मांग है कि मंदिर में भारत के बजाय नेपाल के पुजारियों को नियुक्त किया जाए। इस साल जनवरी में माओवादियों की अगुआई वाली सरकार ने प्रतिष्ठित पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना का काम नेपाल के ब्रा±मणों से कराने का फैसला किया था, लेकिन इसका भारी विरोध हुआ। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया, मगर तत्कालीन नेपाल सरकार ने इसके बावजूद स्थानीय पुजारियों की नियुक्ति कर दी थी। इस मंदिर में परंपरागत तौर पर दक्षिण भारतीय ब्रा±मण ही पूजा-पाठ करते आए हैं, इन्हें भट्ट कहा जाता है। उनका सहयोग स्थानीय नेपाली पुजारी करते हैं, मगर उनका कद ब्रा±मण पुजारियों से छोटा होता है। नेपाली ब्रा±मणों की नियुक्ति के फैसले का जर्बदस्त विरोध होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रचंड ने अपना निर्णय वापस ले लिया था। ताजा विरोध तब हुआ जब नेपाल के प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने कैबिनेट के फैसले के बाद पशुपति एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट (पीएडीटी) द्वारा नियुक्त भारतीय पुजारियों को अपनी मंजूरी दे दी। मंदिर का काम यही ट्र्स्ट देखता है। नेपाल सरकार ने पिछले महीने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी ताकि दक्षिण भारत से तीन पुजारियों को चुना जा सके। मंदिर में पांच पुजारी रहते हैं। इस समिति ने कर्नाटक से दो पुजारियों को चुना था। पीएडीटी ने इन पुजारियों की अनुशंसा कर नाम प्रधानमंत्री के पास भेज दिए। मुख्यमंत्री इस मंदिर के संरक्षक हैं।