बेंगलुरू, 29 अगस्त। भारत का पहला मून मिशन समाप्त होता गया है। इसकी घोषणा इसरो ने शनिवार सायं करीब पांच बजे की।चंद्रयान-1 का इसरो से शुक्रवार अद्र्धरात्रि बाद रेडियो संपर्क टूट गया था। इसके बाद फिर से संपर्क करने के इसरो के सारे प्रयास विफल हो गए।
इसरो ने दावा किया कि उसका मून मिशन पूर्ण रूप से सफल रहा है, चंद्रयान ने वांछित सभी काम बखूबी पूरे किए हैं। भारत का मून मिशन का जीवन करीब दस महीने का रहा। इसरो को वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-1 पिछले साल 22 अक्टूबर को छोडा था। इसरो ने बताया कि बेंगलुरू से चालीस किलोमीटर दूर ब्यालालू में डीप स्पेस नेटवर्क में पिछले ऑर्बिट से 12.25 मिनट का चंद्रयान से आखिरी डेटा मिला था। इसके बाद चंद्रयान-1 से दुबारा रेडियो संपर्क करने का वैज्ञानिकों ने भरसक प्रयास किया, लेनिक वे सफल नहीं हो सके।
इसरो वैज्ञानिकों ने डेटा के विश्लेषण से चंद्रयान की स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। इससे पहले 16 मई को चंद्रयान-1 का एक अहम उपकरण स्टार सेंसर ओवर हीटिंग की वजह से काम करने में नाकाम हो गया था, लेनिक चंद्रयान में लगे जाइरोस्कोप को एक्टिवेट करके और उसका तालमेल बाकी के इलेक्ट्रो मैकेनिकल डिवाइस के साथ बैठाकर इस समस्या से निपट लिया गया था। तब से यह बराबर बेहतरीन कार्य कर रहा था। इसरो वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि चंद्रयान-1 को जो मिशन दिया गया था, वह उसने पूरा कर दिया है। चंद्रयान ने ऑर्बिट में 312 दिन पूरे करने के साथ ही चंद्रमा की कक्षा में 3400 चक्कर पूरे किए हैं।
चंद्रयान ने इस दौरान कई अहम डेटा भेजे हैं। उसने मून मैपिंग का पूरा करने के साथ ही चंद्रमा पर हीलियम-3 का पता लगाया है। चंद्रयान-1 ने चंद्रयान-2 के लिए महत्वपूर्ण डेटा जुटाए हैं और मौजूदा में वह चंद्रमा पर पानी की खोज में लगा हुआ था। इनके अलावा भी काफी महत्वपूर्ण डेटा इससे प्राप्त हुए हैं।
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