नई दिल्ली, 27 अगस्त। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुघवार को कहा कि दिल्ली और मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों को हवाई अड्डा विकास शुल्क(एडीबी) देना ही होगा, और इस पर रोक लगाने से सार्वजनिक-निजी सहयोग (पीपीपी)मॉडल पर प्रतिकूल प्रभाव पड सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुघवार को एडीबी वसूलने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में एक मार्च 2009 से घरेलू उडानें पकडने पर यात्रियों से 200 रूपये और विदेशों के लिए उडानें पकडने वालों से 1300 रूपये वसूलने को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाघीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा एडीएफ लागू करने में हमने कोई अनियमितता नही पाई। न्यायालय ने कहा कि यदि भारतीय हवाई अड्डा प्राघिकरण यात्रियों की सुविघा के लिए कार्य कर रहा है, तो उसे एडीएफ लगाने का अघिकार है।
न्यायालय ने भारतीय हवाई अड्डा प्राघिकरण, दिल्ली इंटरनेशनल एथॉरिटी लिमिटेड (डीआईएएल)और मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (एमआईएएल)के तर्को को सुनने के बाद पिछले सप्ताह अपना आदेश सुरक्षित कर लिया था।
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