नई दिल्ली, 19 अगस्त। पहली भारतीय परमाणु पनडुब्बी "आईएनएस अरिहन्त" के हाल ही में जलावतरण के बाद अब दूसरी परमाणु पनडुब्बी के भी जल्द तैयार होने की उम्मीद है। यह पनडुब्बी लय समय से कही पहले और आधी से कम आगत पर विकसित कर ली जाएगी। भारत में परमाणु परियोजना के संस्थापक वाइस एडमिरल मिहिर के. राय ने एक साक्षात्कार में बताया कि हार्बर ट्रायल शुरू होने के बाद "आईएनएस अरिहन्त" के समुद्री व हथियार प्रणालियों के परीक्षण ढाई साल में पूरे हाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि एक बार भरा गया ईधन सात साल तक चलेगा। राय ने कहा कि परमाणु पनडुब्बी परियोजना को सोवियत संघ के विघटन से सबसे तगडा झटका लगा था। सोवियत संघ के टूटने के बाद बने रूस ने आईएनएस चक्र की लीज खत्म कर दी थी। हालाकि 2004 तक रूस में स्थिरता बहाल होने के बाद भारत ने एक बार फिर उसके साथ नया समझौता किया। राय ने 40 साल से गोपीनयता के पर्दे में चली इस परियोजना का खुलासा विशाखात्तनम स्थित शिपयार्ड ने उस समय हुआ, जब प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह ने उनका नाम पुकारा।
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