लंदन, 16 जुलाई। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरब गांगुली की उपलब्घियों मे एक और नया अघ्याय जुड गया जब केन्द्रीय लंकाशायर विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद फेलोशिप से नवाजा गया है। इस के साथ दादा अब डा. सौरव गांगुली के रूप में जाने जाएंगे। पिछले साल 113 टेस्ट और 311 एक दिवसीय मैच खेलने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले गांगुली को जज्बे और प्रतिबद्धता के साथ असीमित प्रतिबद्धता के लिए फेलोशिप से नवाजा गया। लंकाशायर में विश्वविद्यालय के प्रबंघन विभाग के कार्यवाहक डीन घर्मा कोवुरी ने निजी तौर पर फेलोशिप ग्रहण करने के बाद गांगुली ने कहा "यह बहुत बडा सम्मान है। जब कुद माह पहले मुणे इसकी जानकारी मिली और मुझे गर्व महसूस हुआ और मै यहां आकर खुश हू।" इस 37 वर्षीय क्रिकेटर ने कहा "लंकाशायक के साथ मेरा लंबा संबघ रहा है। मैने अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय ओल्ड टै्रफर्ड में 13 साल पहले खेला और लंकाशायर कांउटी क्रिकेट क्लब के साथ समय भी बिताया। गांगुली ने कहा लंकाशायर के बारे में जो सबसे अच्छी बात मुझे याद आ रही है वह अपै्रल 2000 की बात है जब मै 10 डिग्री तापमान मे मैदान पर उतरा । मै स्लिप में खडा था। और काफी ठंड होने के कारण जेब से हाथ बाहर नहीं निकाल पा रहा था। भाग्य से माइकल आथर्टन में मुझे मिड आन पर जाने को कहा जहां मैने अपने शरीर को गर्म रखने का प्रयाास किया। पूर्व भारतीय बल्लेबाज और कप्तान गांगुली ने कहा "मै कोलकाता में प्री स्कूल से कालेज के बच्चाों के लिए अपना खुद का इंस्टीट्यूट खोलने जा रहूं और इससे लंकाशायर विश्वविद्यालय के साथ मेरे रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत होंगे।"