मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) को एक फीसदी बढाकर 25 फीसदी कर दिया। जिससे अब कमर्शल बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों में पहले से अधिक निवेश करना होगा। बैंक ने महंगाई दर का अनुमान भी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया हैं। रिजर्व बैंक ने हालांकि रेपो, रिजर्व रेपो दर और नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) जैसी प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखा हैं। रिवर्स रेपो रेट 3.25 और सीआरआर 5 प्रतिशत पर बने रहेंगे। मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही की समीक्षा में एसएलआर बढाने का फैसला मुद्रास्फीतिक आशंकाओं के मद्देनजर किया गया हैं। इस समय मुख्य तौर पर खाने पीने की चीजों की कीमतों में तेजी के कारण मुद्रास्फीति का दबाव बढ रहा हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि एसएलआर बढाने से बैंकों के पास नकदी या निजी क्षेत्र के लिए ऋण की कमी नहीं होगी। आरबीआई ने मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेजों को यूरो, येन और पौंड में वायदा कारोबार की अनुमति देने का प्रस्ताव किया। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मौजूदा वित्त वर्ष 2009-10 की दूसरी तिमाही की मौद्रिक समीक्षा के मौके पर बैंक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक के बाकी बचे समय में मौद्रिक नीति की समीक्षा आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की स्थिति को देखते हुए करेगा और जैसी आवश्यकता पडेगी, वैसे कदम उठाए जाएंगे।
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