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कहीं सीनियर बादल मना रहे हैं, कहीं जूनियर बादल डरा रहे हैं

Senior badal are celebrating somewhere, anywhere badal Junior are scaring - Punjab-Chandigarh News in Hindi

चंडीगढ़ (बलवंत तक्षक)। पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अकाली दल में रूठने-मनाने का दौर जारी है। कहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को मना कर वापस अकाली दल में ला रहे हैं तो कहीं उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पार्टी छोड़ने का मन बना बैठे वरिष्ठ नेताओं को अकाली दल में बने रहने को मजबूर कर रहे हैं। चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने तक रूठने-मनाने का दौर इसी तरह जारी रहेगा। पंजाब में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। अकाली दल के पूर्व मंत्री कैप्टन बलबीर सिंह बाठ थोड़े समय पहले पार्टी नेतृत्व से नाराज हो कर आप पार्टी में शामिल हो गए थे। बाठ अकाली दल के टिकट पर तीन बार विधायक रहे हैं। सीनियर बादल ने चुनावी नुकसान को रोकने के मकसद से खुद बाठ को मनाया। बादल ने स्वीकार किया कि बाठ के अकाली दल छोड़ने में कहीं न कहीं पार्टी से गलती हुई है। बादल ने कहा, कैप्टन बाठ के खून में अकाली दल है। माना जा रहा है कि बाठ के आप से अकाली दल में लौट आने से हरगोबिंदपुर सीट पर अकाली-भाजपा गठबंधन उम्मीदवार की जीत की संभावना बन गई हैं। बाठ को मनाने के लिए मुख्यमंत्री बादल के साथ लोक संपर्क मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी उनके घर पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद बाठ ने बादल से पार्टी में अपनी उपेक्षा की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि पार्टी में उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा। बादल के मनाने पर न केवल बाठ मान गए, बल्कि आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर पार्टी में तानाशाही रवैया अपनाये जाने के आरोप भी लगाए। उधर, अकाली दल के सांसद शेरसिंह घुबाया के परिजनों ने कांग्रेस का दामन थामने का मन बना लिया था, लेकिन अब उन्हें रोक लिया गया है। घुबाया के बेटे दविंदर सिंह को कांग्रेस पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद थी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से घुबाया परिवार को भरोसा दिलाया गया था कि टिकट वितरण के दौरान उन्हें एडजस्ट कर दिया जाएगा। घुबाया के अकाली दल छोड़ने का बादल को राजनीतिक तौर पर बड़े नुकसान का अंदाज लगाया जा रहा था। बताते हैं कि घुबाया को मनाने के बजाये डराया गया। उनके शैक्षिक संस्थानों पर विजिलेंस के छापे पड़े। छापे के बाद आशंका व्यक्त की गई कि अगर घुबाया के परिवार के लोगों ने अकाली दल छोड़ा तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। घुबाया राय सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। घुबाया का उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के चुनाव क्षेत्र जलालाबाद में अच्छा प्रभाव है। जलालाबाद के साथ लगते अन्य तीन विधानसभा क्षेत्रों में राय सिखों के वोट अच्छी-खासी तादाद में हैं। जलालाबाद से सुखबीर बादल के मुकाबले आप ने सांसद भगवंत मान को मैदान में उतारा है। मान अपने प्रचार के दौरान जूनियर बादल को उनके मुकाबले चुनाव लड़ने की लगातार चुनौती दे रहे हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि सुखबीर बादल जलालाबाद से ही चुनाव लड़ेंगे या किसी दूसरे क्षेत्र से किस्मत आजमाएंगे। अगर घुबाया के परिवार के लोग कांग्रेस में शामिल हो जाते तो अकाली दल को नुकसान का अंदेशा था। विजिलेंस छापे के बाद घुबाया के परिवार के लोगों ने अकाली दल छोड़ने और कांग्रेस मेंं शामिल होने का इरादा छोड़ दिया है।
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Web Title-Senior badal are celebrating somewhere, anywhere badal Junior are scaring
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