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ये हैं कालसर्प योग के लक्षण, ऐसे बचें दुष्परिणामों से

कालसर्प योग विवाद का विषय है। इस योग के दुष्परिणाम एवं उनका अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन की अनदेखी किए जाने पर भी एक बात निर्विवाद माननी पडती है कि इस योग में निश्चित रूप से तथ्यांश है। इसका कारण यह है कि कालसर्प योग में जन्मे व्यक्ति का कोई न कोई पक्ष कमजोर रहता है। अनवरत कष्ट सहने के बावजूद यश प्राप्ति न होना तथा स्थिरता का अभाव होना आदि कालसर्प योग के प्रमुख लक्षण हैं।

यह योग तब होता है जब राहु और केतु के एक ओर सभी ग्रह आ जाते हैं। नक्षत्र, ग्रह, राहु-केतु का उलटा भ्रमण तथा स्थानों के क्रमानुसार अनंत, कुलिक और वासुकि आदि 12 तरह के कालसर्प योग हैं।

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Web Title:These are signs of Kalsarpa yoga
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