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भारत-जापान के बीच बढ़ती नजदीकियों से तिलमिलाया चीन, कहा-गठबंधन न बनाएं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिंजो आबे के साथ गुरुवार को भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी। इसके बाद भारत और जापान ने एक सुर में पाकिस्तान से वर्ष 2008 में हुए मुंबई और वर्ष 2016 में पठानकोट के वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं को सजा देने की मांग की। साथ ही चीन को समुद्री आवाजाही में बाधा पहुंचाने के लिए इशारों में चेताया है। लेकिन, भारत और जापान के बीच बढ़ती नजदीकियों पर चीन तिलमिला गया है। चीन ने गुरुवार को कहा कि भारत व जापान को गठबंधन बनाने की बजाय साझेदारी के लिए काम करना चाहिए। चीन ने यह भी उम्मीद जताई कि भारत-जापान संबंध क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के अनुकूल होंगे।

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अहमदाबाद में दोनों नेताओं के बीच बैठक के नतीजे पर हमारी नजर है। मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, उनमें क्या चर्चा होती है, हमें विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है। हम क्षेत्रीय देशों में बिना टकराव के बातचीत और गठबंधन की बजाय साझेदारी में काम करने का समर्थन करते हैं। हुआ ने कहा, हम क्षेत्र के देशों के बीच सामान्य संबंधों के विकास का खुले तौर पर स्वागत करते हैं। हम आशा करते हैं कि उनके सबंध क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के अनुकूल होंगे और इस संदर्भ में एक रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं। भारत व जापान के बीच बढ़ते संबंधों से चीन चिंतित है, वह साझेदारी को अपने विरोध के तौर पर देखता है।

भारत-चीन की अपील, आतंकवादियों को सजा दें पाकिस्तान

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान से मुंबई और पठानकोट आतंकवादी हमले में शामिल साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने की अपील की गई है। दोनों नेता अलकायदा, आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), लश्कर-ए-तैयबा और इनसे संबंधित आतंकवादी संगठनों के खतरे के खिलाफ आपसी सहयोग मजबूत करने के लिए सहमत हुए हैं।

मोदी और आबे ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक-दूसरे की सदस्यता का समर्थन करते हुए बयान में कहा, दोनों देश ढृढ़ता से इस बात पर सहमत हैं कि सुरक्षा परिषद विस्तार में भारत और जापान स्थायी सदस्य के लिए वैध उम्मीदवार हैं। चीन की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना की आलोचना करते हुए बयान में देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को ध्यान में रखते हुए एक खुली, पारदर्शी और अखंडित तरीके से संचार-संपर्क व आधारभूत संरचना को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का विरोध किया है, क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू एवं कश्मीर से होकर गुजरती है।

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