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मेष |
| सितंबर |
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व्यक्तिगत: आप ऊर्जा से भरपूर रहेंगे और आपके काम के घंटे औसत से अधिक रहेंगे। काम होगा भी बहुत अधिक और बकाया कामों का निपटारा भी आप करना पसंद करेंगे। इस समय आपके जनसम्पर्क बहुत तेजी से विकसित होंगे। तेज गति से कार्य करने के कारण गल्तियां भी छूटेंगी। यात्राओं का कार्यक्रम बनेगा जिनमे खर्चा भी बहुत अधिक होगा। आप उधार लेंगे तथा क्रेडिट कार्ड की मदद भी लेंगे। बीच किसी यात्रा मे कोई छोटी सी समस्या आ सकती है। आपको चाहिए कि सामान कम से कम साथ रखें तथा कम लोगों से मिलें। अनावश्यक लोगों से नहीं मिलें।
व्यावसायिक: व्यावसायिक मामलों मे यह समय शानदार है जब दैनिक आय बढ़ेगी, रोजगार क्षेत्रों मे उन्नति आएगी, यदि नौकरी करते हैं तो सम्मान बढ़ेगा। नौकरी में आ रही किसी समस्या का समाधान दिखने लगेगा। व्यावसायिक प्रतिस्पर्द्धा में इस समय आप शत्रुओं पर बहुत भारी हैं और शनि, सूर्य की युति शत्रु पर मर्मान्तक प्रहार करने की प्रेरणा देती है। इस समय बृहस्पति वक्री होने के कारण अति शक्तिशाली हैं और लाभ और खर्चा खूब देना चाहते हैं। अचानक कोई ऎसी बात होगी कि दैनिक आय बढ़नी शुरू हो जाएगी। भाई-बहिनों से कोई ब़डा सहयोग इस समय नहीं मिल पाएगा और आपको अपने बूते ही सारे कार्य करने होंगे।
स्वास्थ्य: वाहन सावधानी से चलाएं। शनि और सूर्य इतने पास हैं कि कुछ भी घट सकता है। शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होगा, इससे कामकाज मे तो गति आएगी परन्तु वाहन की गति पर नियंत्रण रखना है। एक दिन के लिए अस्पताल जाना प़ड सकता है। यदि सूर्य की आराधना करें तो इससे बच सकते हैं। मंगल, शुक्र की युति राशि से सप्तम मे है इसके कारण आपका संसर्ग सुख बढ़ता है परन्तु साथ ही अनियमित खाना-पीना आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। शक्तिवर्द्धक दवाइयों और शाकाहार का आप प्रयोग करेंगे।
रिश्ते-नाते: प्रेम संबंधों मे प्रगाढ़ता आएगी। रूठने-मनाने का दौर चलेगा। आप किसी मामले में जिद पक़ड लेंगे। यह समय जिद का नहीं बल्कि अपने आप में आवश्यक संशोधन करने का है। निजी संबंधों मे अहंकार विनाशकारक है।पारिवारिक रिश्ते और मजबूत होंगे। रक्त संबंधियों से कुछ परेशानियां हो सकती हैं परन्तु वे स्थायी नहीं हैं। मित्र इस समय अच्छी भूमिका निभाएंगे। लेन-देन की बातों में बहुत सावधानी बरतें जिससे कि लापरवाही से कही गई बात से कोई व्यावसायिक रिश्ता नहीं बिग़डे। |
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आलेख |
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धन कब लेवें और कब देवें |
| यह समस्या केवल व्यवसायी वर्ग की ही नहीं है। आज हर कोई इस जाल में उलझा हुआ है। कोई धन उधार देकर रोता मिलता है तो कोई धन लेकर पछता रहा है। |
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आपकी मित्र राशियाँ |
| मेष
आपकी मित्र राशियां : कर्क, सिंह, घनु, मीन
शत्रु राशियां : मकर व कुंभ
शुभ रंग : लाल
शुभ वार : मंगलवार
शुभ रत्न : मूंगा, माणिक्य व पुखराज |
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वास्तु : कहां हो आपका ड्राइंग रूम |
| वास्तु शास्त्र में ड्राइंग रूम को लेकर कोई विशेष चर्चा नहीं है। कुछ नौसिखिये वास्तुशाçस्त्रयों ने वायव्य कोण में ड्राइंग रूम बनाने का प्रस्ताव किया है जो कि प्राचीन वास्तु शास्त्रों की भावना के अनुरूप नहीं है। |
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शुक्र का रत्न हीरा |
| शुक्र ग्रह का नाम आते ही मन में ऎश्वर्य, सुख, सम्पदा, यौवन, विलासिता, योग, धन, सम्पत्ति इत्यादि के भाव मन में आने लग जाते हैं और ऎसा हो भी क्यों नहीं ..... |
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ऑरा क्या है? |
| प्रत्येक व्यक्ति में एक ऑरिक क्षेत्र होता है जिसे प्रभा मण्डल या ऑरा अथवा बॉयो प्लाज्यिक कहते हैं। यह शरीर का सुरक्षा कवच होता है। सभी व्यक्तियों में ऑरिक क्षेत्र का अनुभव होता है। |
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90-10 का सिद्धांत |
| एक बहुत ही महत्वपूर्ण सूत्र है जो जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण दे सकता है। "90-10 का सिद्धांत" नाम के इस सूत्र के अनुसार हमारे जीवन में जो घटित होता है उसका मात्र 10 प्रतिशत हमारे हाथ में नहीं होता बाकी का 90 प्रतिशत हमारे हाथ में होता है। |
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मास्टर ब्लास्टर सचिन |
| महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर विश्व में एक अनूठा स्थान रखते हैं और आने कई वर्षो तक इनके रिकाड्र्स की बराबरी तक पहुंचना किसी खिलाडी के लिए असंभव नहीं परन्तु कठिन और दीर्घ सूत्री कार्यक्रम अवश्य हो सकता है। |
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कार्यालय प्रबंघन |
| कार्यालय, दुकान या मकान बदलते ही कई बार असफलता का सामना करना पडता है। इसका कारण वास्तु है। प्राय: ज्योतिष की अंतर्दशाओं के प्रभाव में व्यक्तियों के कार्य करने के स्थान या शहर बदल जाते हैं और नई परिस्थितियों में कई बार वास्तुशास्त्र के अशुभ स्थानों के कारण जमे-जमाए व्यवसाय में हानि उठानी पडती है। |
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लिखावट से सब कुछ जानिए |
| हम व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार को तीन श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं : 1. बहिर्मुखी व्यक्तित्व, 2. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व और 3. मघ्यस्थ ... |
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हस्ताक्षर और आपका भविष्य |
| यह तो आप जानते ही हैं कि हर व्यक्ति के दो रूप होते हैं - एक रूप जो उसके असली व्यक्तित्व को दर्शाता है तथा दूसरा रूप जो वह समाज में सबको दिखाने के लिए अपनाए रखता है। समाज में लोक मर्यादा के कारण कई बार हमें अलग तरह से व्यवहार करना पडता है जिसे आप कमजोरी भी कह सकते हैं अत: इसके फलस्वरूप व्यवहार में भिन्नता होना स्वाभाविक है। |
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