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मोदी का गब्बर सिंह टैक्स बना है चंद उद्योगपतियों के फायदे के लिए – रणदीप सुरजेवाला

Modi Gst is made for the benefit of a few industrialists said congress lader Randeep Surjewala in kaithal - Kaithal News in Hindi

कैथल।भारत के 125 करोड़ लोगों और कांग्रेस पार्टी के विरोध के आगे भाजपा सरकार का अहंकार हार गया। कांग्रेस पार्टी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा बनाए गए लगातार दबाव के आगे मोदी सरकार और जीएसटी काउंसिल को झुकना पड़ा और मोदी सरकार दैनिक उपयोग की कुछ वस्तुओं पर टैक्स 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत करने पर मजबूर हुई ये शब्द किसान भवन अपने निवास पर जनता की समस्याएं सुनते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस मीडिया प्रभारी व मौजूदा विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहे।


सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा चंद वस्तुओं पर लगाने वाले टैक्स को आंशिक तौर से कम करने से जीएसटी का अर्थव्यवस्था पर लग रही करारी चोट की वास्तविकता नहीं बदल जायेगी। भारत की जनता खासकर दुकानदार, व्यापारी, लघु एव कुटीर उधोग मोदी के गब्बर सिंह टैक्स की नौसिखिया संरचना, बनावट और क्रियान्वन से आज भी हताश व निराश हैं।


सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही लघु मध्यम एवं कुटीर उधोग, कारोबारियों एवं छोटे व्यापारियों की ओर से लगातार मांगे उठा रही है जो इस प्रकार हैं कि जीएसटी में टैक्स की अनेकों दरें सुनिश्चित करना मोदी सरकार की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। एक देश एक टैक्स आज एक देश सात टैक्स बन चुका है। कांग्रेस पार्टी ने पहले दिन से ही 18 प्रतिशत जीएसटी की सीमा तय करने की माँग की थी लेकिन हठी मोदी सरकार ने 28 प्रतिशत वाला जीएसटी दिया जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। पेट्रोलियम उत्पादों, रियल एस्टेट और बिजली को जीएसटी के दायरे में क्यों नही लाया जा रहा। यदि सरकार इन सबको जीएसटी के दायरे में नही लाती तो आज भी 50 प्रतिशत राजस्व तो जीएसटी के दायरे से बाहर रहता है फिर एक देश एक टैक्स का सिद्धाँत कैसे लागू होगा ? असलियत यह है कि पेट्रोल/डीजल को जीएसटी टैक्स दायरे में न लाकर मोदी सरकार हर साल अपने खजाने में 2 लाख 67 हजार करोड़ रुपए भर रही है।

जीएसटी के मौजूदा स्वरूप की अनुपालना लगभग असम्भव है। जीएसटी फार्म भरने की जटिल व असम्भव प्रक्रिया से व्यापारी, कारोबारी और लघु व कुटीर उधोग के कामकाज पर ताला लग गया है। जीएसटी नेटवर्क लगभग हर रोज फेल हो जाता है। नतीजा यह है कि न तो रिटर्न फाईल हो पाती है और न ही व्यापारियों के बिल जीएसटी नेटवर्क पर अपलोड हो पाते। इसका सीधा नुकसान भारत के व्यापारी और कारोबारी उठा रहे हैं। टेक्सटाइल कृषि के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा अदारा है। त्रुटिपूर्ण टैक्स संरचना के चलते यह क्षेत्र भारी मंदी के दौर से गुजर रहा है। क्या मोदी सरकार को इस बात की जानकारी भी है कि एक तरफ उन्होने धागे पर 12 प्रतिशत का टैक्स लगा दिया तो वही दूसरी तरफ कपड़ा पर 5 प्रतिशत टैक्स लगा दिया। टैक्स में हुई सोची समझी त्रुटियों ने कपड़ा बुनने वाली नॉन इंटीग्रेटेड टैक्सटाइल कम्पनियों (जिनका हिस्सा 70 प्रतिशत है) की आजीविका व लाभ पर तालाबंदी लगा दी है जबकि धागा खरीदकर कपड़ा दोनों बनाने वाली मुठ्ठीभर बड़ी कम्पनियां भारी फायदा कमा रही हैं। सच्चाई बिलकुल सामने है कि धागा खरीदकर कप[डा बनाने वाले मध्यम, लघु व कुटीर उधोगों पर 17 प्रतिशत टैक्स( 12 प्रतिशत धागा खरीद पर + 5 प्रतिशत बुने हुए कपडे पर) लेकिन मुठ्ठीभर धागे से कपड़ा तक स्वयं बनाने वाली कम्पनियों पर ५ प्रतिशत टैक्स। जिसका खामियाजा सूरत, पानीपत, लुधियाना, तिरुपुर व देश के लाखों छोटे छोटे कारोबारी भुगत रहे हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र पर टैक्स लगाया गया हो। ट्रैक्टर एव अन्य सभी उपकरणों पर 12 प्रतिशत का जीएसटी टैक्स लगाया गया जबकि टायर, ट्यूब और ट्रांसमिशन पार्ट्स पर 18 प्रतिशत का जीएसटी टैक्स लगाया गया। कीटनाशक दवाइयों पर 18 प्रतिशत, खाद पर 5 प्रतिशत तथा कोल्ड स्टोरेज पर 18 प्रतिशत का जीएसटी लगा दिया गया है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाले 62 करोड़ लोगों पर टैक्स का बोझ लाड दिया गया है। उन्होंने कहा कि फैसला लेने की जगह टालमटोल करना मोदी सरकार के काम का तरीका बन गया है। टीडीएस और टीसीएस का क्रियान्वन 31 मार्च 2018 तक के लिए टाल दिया गया है। रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत जीएसटी में अनरजिस्टर्ड व्यक्ति या संस्थान से खरीददारी करने पर खरीददार को जीएसटी जमा कराना होता है, इस व्यवस्था को ख़त्म करने की बजाय मात्र 31 मार्च 2018 तक के लिए टाल दिया गया है। ईवे बिल के कोंसेप्ट को भी 1 अप्रैल 2018 तक के लिए लंबित कर दिया गया है क्योंकि इसकी संरचना और उपयोग में ली जाने वाली टेक्नॉलोजी अभी तक निर्मित नहीं हो पाई है। टैक्स रिफंड सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है और निर्यात खतरे में है क्योंकि ई वोलेट सिस्टम के क्रियान्वन को 31 मार्च 2018 तक के लिए लंबित कर दिया गया है। सरकार द्वारा किए गए सारे वाडे खोखले हैं जिनपर स्पष्ट निर्णय के अभाव में तलवार लटक रही है। अगर देखा जाए तो इनमें से किसी भी समस्या का समाधान मोदी सरकार अभी तक जीएसटी काउंसिल से नहीं करवा पाई है जिससे भाजपा सरकार की अक्षमता और नौसिखिएपन का सबसे बड़ा सबूत है।

मोदी और जेटली केवल लच्छेदार बातें और लुभावने वादे तो करते हैं लेकिन जीएसटी की दोषपूर्ण संरचना और बनावट को ठीक करने में पूरी तरह से फेल साबित हुए हैं और जब तक जीएसटी में आमूलचूल परिवर्तन नहीं हो जाता तब तक कांग्रेस पार्टी अपना संघर्ष जारी रखेगी।

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