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ये संयोग और ग्रह बताते हैं, कब होगी आपकी विदेश यात्रा

अपने घर में रहकर सफल और संपन्न होने से बेहतर सपना और क्या हो सकता है लेकिन कुछ लोग विदेश में जाकर सफल होना चाहते हैं। कुछ लोगों की इच्छा घूमने के लिए विदेश जाने की रहती है। कुछ लोग ऐसी परदेसी यात्राओं में सुखी रहते हैं तो कई विफल और निराश हो घर लौटते हैं। कौनसे योग हमें विदेश में बेहतर भविष्य का वादा करते हैं और कौनसे ग्रह हमारी यात्राओं में बाधा बनते हैं। एक खास नजर-


यात्रा के सामान्य योग तीसरे भाव से बनते हैं। कुंडली का तीसरा भाव उन यात्राओं के लिए देखा जाता है जो आमतौर पर छोटे समय की यात्रा होती है। मूल रूप से यह भाव साहस और सहजता का है। अगर लग्न से तीसरा भाव मजबूत हो तो ही व्यक्ति सफल यात्राएं कर पाता है। इसके साथ ही बारहवां भाव घर छोडऩे में मदद करता है। विदेशी संबंधों को भी बारहवें भाव से ही देखा जाता है। यह भाव मूल रूप से क्षरण का भाव है। यह क्षरण पैसा खर्च होने के रूप में भी हो सकता है और शारीरिक क्षरण के रूप में भी।

किसी लग्न विशेष में तीसरे भाव के अधिपति और बारहवें भाव के अधिपति की दशा या अंतरदशा आने पर जातक को घर से बाहर निकलना पड़ता है। जब तक यह दशा रहती है, जातक घर से दूर रहता है। अधिकतर मामलों में दशा बीत जाने के बाद जातक फिर से घर लौट आता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में लग्न और बारहवें भाव के अधिपतियों का अंतर्संबंध होता है वे न केवल घर से दूर जाकर सफल होते हैं, बल्कि परदेस में ही बस भी जाते हैं।

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Web Title-These planets show that when your foreign travel is possible
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