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करवा चौथ व्रत से पहले जरूर जान लें पूजा विधि व्रत करने के नियम

Before Karwa Chauth fast, know the rules of fasting worship method - Puja Path in Hindi

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार सुहागिन महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत है। सभी व्रतों में करवा चौथ (Karva Chauth) के व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन महिलाएं अन्न और जल सेवन का नहीं करती है। शाम को चन्द्रमा की पूजा के साथ करवा चौथ का व्रत पूरा होता है। कुवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती है। करवा चौथ के मौके पर आप अपने पार्टनर को करवा चौथ की शुभकामनाएं शेयर कर उनका दिन स्पेशल बना सकते हैं। तो चलिए जानते हैं करवा चौथ क्यों मनाया जाता है, व्रत कथा और पूजा विधि के बारे में।

करवा चौथ क्यों मानते है...
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत करने से पति की आयु लम्बी होती है। पूरे दिन अन्न जल त्याग कर रात को चन्द्रमा के दर्शन और पतिदेव की आरती के बाद ही जल ग्रहण किया जाता है। कुछ किवदंतियों के अनुसार सभी सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है अगर कोई कुवारी कन्या भी पूरे श्रद्धा भाव से इस व्रत को करती हैं तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और उसे मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इसके अलावा करवा चौथ पर माता पार्वती, शिव जी और कार्तिकेय का पूजन भी किया जाता है। यह शुभ माना जाता है।

करवा चौथ से जुड़ी कथा...
करवा चौथ की कथा के अनुसार एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। मगर रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन करने को कहा। इस पर बहन ने कहा अभी चांद नहीं निकला, मैं अर्ध्य देकर भोजन करूंगी। मगर साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उसकी चिंता करते थे उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुःख हुआ। वह नहीं चाहते थे उनकी बहन भूखी रहे। ऐसे में साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम अर्ध्य देकर भोजन ग्रहण कर लो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखों, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्ध्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा-बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं। साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्ध्य देकर भोजन कर लिया। ऐसा करने पर करवा चौथ का व्रत भंग हो गया और विध्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की से रुष्ट हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बहुत बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। तब लड़की ने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान से व्रत पूरा किया। व्रत संपन्न होने पर गणेश जी लड़की से प्रशन्न हुए और उसके पति को जीवनदान दिया और सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

करवा चौथ पूजा विधि...

● करवा चौथ के दिन सुबह सूर्य उदय होने से पहले सरगी ग्रहण की जाती है। सरगी एक प्रकार की खाने की सामग्री होती है जिसे घर के बड़े सुहागिन महिला को देती है।

● इसके बाद स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इस बात का खास ध्यान रखें की आपको व्रत के दुराण अन्न और जल दोनों ग्रहण नहीं करना है।

● शाम को दीपक प्रज्वलित करके करवाचौथ की कथा पढ़े। आप यह व्रत कथा अन्य महिलाओं के साथ भी पढ़ सकते हैं।

● उसके बाद चंद्रमा निकलने से पहले ही एक थाली में धूप-दीप, फल, मिष्ठान, जल भरा लौटा रख थाल सजा लें।

● टोटी वाले एक लोटे में अर्घ्य देने के लिए जल अलग से भर लें।

● मिट्टी के बने करवा में चावल भरकर उसमें दक्षिणा के रुप में कुछ एक सिक्का जरूर रखे।

● चंद्रमा निकलने के बाद चंद्र दर्शन कर पूजन करें और देवताओं का तिलक कर फूल मिष्ठान अर्पित करें।

● अब चंद्रमा को अर्घ्य दें और छलनी में दीप जलाकर चंद्र दर्शन करें, उसके बाद पति का मुख देखें।

● मुख दर्शन के बाद पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करें और घर के सभी लोगों का आशीर्वाद लें।

करवा चौथ में किन बातों का ध्यान रखें...
करवा चौथ के व्रत के दौरान कुछ नियमों के बारे में जरूर पता होना चाहिए। यह नियम व्रत को विधिपूर्वक पूरा करने में मदद करता है। करवा चौथ का व्रत हर महिला के लिए इसलिए भी खास हैं क्योंकि इस दिन पतियों द्वारा अपनी पत्नियों को तरह तरह के उपहार भेट किये जाते है। उपहार के ज़रिये पति अपनी पत्नी पर प्यार जताते हैं (Karwa Chauth Gift for Wife in Hindi)। अगर आप भी करवा चौथ के व्रत को दोगुना स्पेशल बनाना चाहते हैं तो आपनी पत्नियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ प्यारे प्यारे गिफ्ट (Karwa Chauth Gift for Wife in Hindi) दें।

● करवा चौथ के दौरान महिलाओं को 16 श्रृंगार जरूर करना चाहिए।
● इस दिन मेहँदी लगाना शुभ माना जाता है।
● कई महिलाएं इस बात को नहीं जानती करवा चौथ वाले दिन अपने सुहाग और श्रृंगार का कोई भी समान किसी दूसरी महिला को नहीं देना चाहिए।
● सूर्योदय से पहले सरगी खाएं और व्रत का संकल्प लें। यह रस्म करवा चौथ में बहुत अहम् मानी जाती है।
● भूल कर भी इस दिन काले या सफेद रंग के वस्त्रों को न पहनें।
● कई किवदंतियों के अनुसार ऐसी भी मान्यता हैं कि इस दिन गौरीशंकर की पूजा जरूर करनी चाहिए जिससे पति पत्नी के बीच प्रेम सदैव बना रहे।

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Web Title-Before Karwa Chauth fast, know the rules of fasting worship method
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Tags: karwa chauth, karwa chauth fast, rules of fasting worship method, astrology in hindi
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