नई दिल्ली। सरकार ने वेतनभोगी कर्मचारियों के विभिन्न अनुलाभ भत्तों पर कर लगाने के नए कानून को अंतिम रूप दे दिया है। इससे उन्हें मकान और वाहन भत्ते के रूप में मिलने वाले पैसे पर टैक्स भरना जरूरी हो जाएगा। नया कानून फ्रिज बेनिफिट टैक्स (एफबीटी) की जगह लेगा। यह व्यवस्था चालू वित्त वर्ष से भी लागू हो सकती है। इससे महंगाई की मार झेर रहे कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ बढेगा।
सूत्रों के अनुसार नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी के परिवार को दिए जाने वाले आवास भत्ते, यात्रा भत्ते तथा अन्य अनुलाभा को शीघ्र ही आयकर काटने के उद्देश्य से वेतन में शामिल किया जा सकता है। सरकार इन भतों की गणना आदि की अधिसूचना जल्द जारी कर सकती है। उल्लेखनीय है कि अब तक वेतनभोगी कर्मचारी के इन भतों पर कर नियोक्ता कंपनी को कानून एफबीटी जमा कराना पडता था।
वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने एफबीटी को 2009-10 के बजट में समाप्त कर एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव किया था जो एक अप्रैल 2010 से लागू होनी थी। जिन लाभो को कर योग्य वेतन में शामिल किया जाएगा उसमें नियोक्ता द्वारा देय आवास सुविधा, आधिकारिक तथा व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए वाहन पर खर्च, चालक का वेतन, नियोक्ता द्वारा दिए जाने पर माली और सफाई कर्मचारी का वेतन तथा कर्मचारी के बच्चों को देय रियायती शिक्षा शामिल है। अर्नेस्ट एंड यंग कर सहयोगी अभिताब सिंह ने नए आयकर आकलन नियमों के बार में पूछने पर कहा, एफबीटी प्रणाली के तहत अनुलाभ का कर बोझ नियोक्ता पर रहता था लेकिन अब यह कर्मचारी पर होगा।
वित्त मंत्रालय आकलन नियमों की घोष्ाणा अभी करेंगा। इनके इस साल एक अप्रैल की पूर्व तिथि से लागू होने संभावना है। इससे कर्मचारियों मुश्किलें बढता तय है।
|